सफ़र में धुप तो होगी जो चल सको तो चलो, सभी हैं भीड़ में तुम भी आगे निकल सको तो चलो. राहें कहां किसी के लिए बदलती हैं, तुम अपने आप को अगर बदल सको तो चलो...
एक इन्सा है अन्दर छुपा हुआ, कभी कभी छ्टपटाटा है, तडपता है, मुझे पुकारता है…तब उसे यहा ले आता हू, एक वाक भी हो जाती है और थोडी खुली हवा मे सास भी ले लेता है…...
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