No Need to Burn Ravana !
>> Tuesday, September 29, 2009
1 : रावण को मेट्रो के किसी बनते स्टेशन या पुल के नीचे खड़ा कर दिया जाए। बाकी का काम मेट्रो वाले कर देंगे।
2 : रावण को आजादपुर सब्जी मंडी भेज दिया जाए, टमाटर, टिंडे के भाव सुनकर वीरगति को प्राप्त हो जाएगा।
3 : रावण को उस रूट पर खड़ा कर दिया जाए, जहां ब्लू लाइन बसें चलती हैं।
4 : रावण को खास तौर पर बीआरटी वाले रूट पर भेजा जाए।
5 : रावण को भारत-पाक शांति वार्ता में लगा दिया जाए। इतना पक जाएगा कि पककर ही टें बोल जाएगा।
6 : रावण को अरुणाचल प्रदेश वाले चीन के बॉर्डर पर भेज दिया जाए। चीनी क्लेम करने लगेंगे कि रावण चीनी है। अरुणाचल प्रदेश बॉर्डर पर कुछ होता है, उस पर चीनी अपना क्लेम ठोंक देते हैं न।
खैर, रावण तो ऐसे टें बोल लेगा, पर ज्यादा बड़ा सवाल यह है कि अगर सच्ची में रामराज आ लिया, तो क्या होगा।
1 : एक पत्नीव्रता सब हो लिए, तो टीवी सीरियलों की दुकान ठप हो लेगी। प्रति व्यक्ति पांच सात अफेयर न हों, तब तक सीरियल का रंग जमता नहीं है।
2 : कोई भी रिश्वत नहीं लेगा। कोई भी हथियारों की दलाली नहीं करेगा। कोई भी कट कमिशन नहीं खाएगा, तो फिर लग्जरी कारों का तो छोड़ो, नॉर्मल कारों का भी कारोबार ठप हो लेगा।
3 : कोई कत्ल नहीं, कहीं चोरी नहीं, तो फिर कई सारे टीवी कार्यक्रमों का क्या होगा। कातिल कब्रिस्तान, चौकन्ने चोर जैसे कार्यक्रमों का क्या होगा।
4 : दैहिक, दैविक, भौतिक ताप नहीं होंगे, तो डॉक्टर परेशानी में पड़ जाएंगे।
5 : कोई झगड़ा नहीं करेगा, तो वकीलों के लिए दिक्कत हो जाएगी।
6 : सारे लोग सिर्फ सच्चे खातों में ही यकीन करेंगे, तो कई सलाहकारों का काम खतरे में पड़ जाएगा।
यानी कुल मिलाकर विकट बेरोजगारी छा जाएगी। विकट परेशानी हो जाएगी। आइए, सब की तरफ से मिलकर दुआ करें कि रामराज न आए।
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